Saturday, 10 December 2016

Congress backs Mayawati on diatribe against BJP’s ‘Hindutva’ agenda

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Wednesday, 29 June 2016

भाजपा बताए उत्तर प्रदेश में विकास क्यों नहीं?


भाजपा बताए उत्तर प्रदेश में विकास क्यों नहीं?
मोदी प्रदेश में आकर अपनी हर जनसभा में प्रदेश का विकास करने और यहां की गरीबी को दूर करने की बढ़-चढ़कर बातें कर रहे हैं।
हमारी पार्टी भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को याद दिलाना चाहती है कि भाजपा का उत्तर प्रदेश में जो शासनकाल रहा है, उस दौरान प्रदेश का कितना विकास किया और यहां के लोगों की कितनी गरीबी दूर की है।
भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जो वादे किये थे, जनता जानना चाहती है कि उन वादों का क्या हुआ।
जमा काला धन वापस लाकर प्रत्येक नागरिक को देने को कहा गया था, वह जनता को अच्छी तरह याद है।
बसपा भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व से जानना चाहती है कि सरकार के दो साल बीतने के बाद भी कालेधन का एक भी रुपया जनता को क्यों नहीं मिल पाया है।
प्रदेश में खासकर बसपा का टिकट लेने के लिये दूसरी पार्टियों में भी भगदड़ मची हुई है। वे अपनी पार्टी के विधायकों को बसपा में जाने से रोकने के लिये मीडिया के जरिये घिनौने हथकंडे अपना रही हैं।
मेरी हमारी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं व सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों से पुरजोर अपील है कि वे इन हथकंडों से हमेशा सावधान रहें।

Friday, 24 June 2016

बहुजन समाज पार्टी को आजतक जो भी छोड़कर गया है वह अकेला गया है, उसके साथ समाज नहीं गया


बहुजन समाज पार्टी को आजतक जो भी छोड़कर गया है वह अकेला गया है, उसके साथ समाज नहीं गया, और इतना ही नहीं जो लोग बसपा को छोड़कर गए अपने निजी स्वार्थ की वजह से छोड़कर गए,
उनका राजनैतिक जीवन ख़त्म हो गया, नजर ही नहीं आया, राजनीती में उनका कोई अता-पता नहीं।
जो भी बसपा को छोड़कर गया है उनसे से काफी लोग माफ़ी मांगकर वापस आ गए हैं, और काफी लोग माफ़ी मांगने के लिए आए दिन फोन करते रहते हैं।
लेकिन यहाँ मैं यह भी बताना चाहती हूँ, खासतौर से उत्तर प्रदेश के मौर्या, शाक्य, कुशवाह, सैनी समाज के भाइयों और बहनो को क्योंकि स्वामी प्रसाद मौर्या 'मौर्या समाज' से सम्बन्ध रखते हैं,
और यह जाति शाक्य, कुशवाह, सैनी आदि काफी नामों से जानी जाती है।
मैं आज मीडिया के माध्यम से बताना चाहती हूँ की स्वामी प्रसाद मौर्या ने बहुजन समाज पार्टी के साथ जो गद्दारी की है।
उसकी सजा इस समाज को नहीं दी जायेगी, एक व्यक्ति गलती करता है इसका मतलब यह नहीं की उसकी सजा पुरे समाज को दी जाये,
अभी तक बहुजन समाज पार्टी द्वारा जिस प्रकार से इन समाज (मौर्या,शाक्य,कुशवाहा,सैनी) को सम्मान मिलता रहा है, आगे भी ऐसे ही सम्मान मिलता रहेगा, ये बात मैं मौर्या, शाक्य, कुशवाह, सैनी समाज को अवगत करना चाहती हूँ।
आजतक देशभर में जो भी व्यक्ति इक्का-दुक्का लोग बहुजन समाज पार्टी को छोड़कर गए हैं वो अपने निजी राजनैतिक स्वार्थ के लिए बसपा को छोड़कर गए हैं उनका समाज के प्रति कोई लगाव नहीं रहा।
इसके पीछे उनका व्यक्तिगत स्वार्थ रहा है,
ऐसे लोगो के निकलने से पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ता,
स्वामी प्रसाद जैसे लोग हमारी पार्टी के कोई मूल व्यक्ति नहीं हैं ये विभिन्न पार्टी से होकर आये हैं,
इनका ना तो समाज से कोई लगाव है ना ही बहुजन समाज पार्टी के मूवमेंट से कोई लेना देना है और ना ही बाबा साहेब से मिशन से।

Saturday, 4 June 2016

गैर कांग्रेसी दलों से नहीं जीत पा रही है बीजेपी


केंद्र सरकार ने दो साल पूरे करने पर अपने प्रचार में जनता की कमाई खर्च की है। 
'बीजेपी केवल कांग्रेस के खिलाफ ही जीत हासिल कर पा रही है और गैर कांग्रेस पार्टियों के मुकाबले पिछड़ रही है और उसे करारी हार का सामना करना पड़ रहा है।' 

हाल ही हुए पांच विधानसभा चुनावों में आए परिणाम बीजेपी के लिए अच्छे नहीं रहे हैं, लेकिन बीजेपी और पीएम मोदी ने इन नतीजों को जिस उल्लास के साथ लिया है, उससे पता चलता है कि बिहार और दिल्ली की हार के बाद पार्टी कितनी हताश है।
असम में कांग्रेस पर जीत को बीजेपी संजीवनी के तौर पर देख रही है।

'बीजेपी सरकार ने दो सालों में कोई जमीनी कार्य नहीं किया है।
बीजेपी अपनी पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के पदचिह्नों पर चल रही है।
काला धन लाने की बात भी हवाई साबित हुई है। इस सरकार में कट्टर संगठनों को सरकारी संरक्षण मिला है। यह सरकार कट्टरवादियों का तुष्टिकरण करती है और संवैधानिक संस्थाओं की विरोधी है।
इसने अपने पैतृक संगठन आरएसएस और सहयोगी संगठनों को छोड़कर सबको अपना दुश्मन बना लिया है।'

'बीजेपी की दिल्ली में करारी हार का सिलसिला, बिहार और पश्चिम बंगाल और साउथ इंडिया में भी जारी रहा है।
असम में जीतने की खुशी से पता चलता है कि आरएसएस समेत बीजेपी को आंसू पोछने की कितनी जरूरत है।
'असम में कांग्रेस अपनी कमियों से हारी। कांग्रेस ने अपनी ताकत का आकलन नहीं किया और गलत रणनीति बनाई। उसने क्षेत्रीय पार्टियों को अलग छोड़ दिया। इससे लोकसभा की तरह असम में बीजेपी को वोट बंटने का फायदा मिला।'

'उत्तर प्रदेश में बीएसपी ही कांग्रेस, बीजेपी और एसपी से मुक्ति दिला सकती है।
बीएसपी का रिकॉर्ड विकास कार्यों और अपराध नियंत्रण में सबसे अच्छा रहा है।
बीएसपी की सरकार बनने पर सड़क, बिजली, पानी, सिंचाई, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पढ़ाई आदि पर हमेशा की तरह विशेष ध्यान दिया जाएगा।

Friday, 3 June 2016

BJP दलित-विरोधी मानसिकता और जातिवादी प्रवृत्ति की रही है


भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य (हरियाणा) में BSP के जनक कांशीराम की प्रतिमा तोड़ने की घटना होती है और हरियाणा सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की।
BJP आज से नहीं, बल्कि जनसंघ के समय से ही अपने चाल, चरित्र और चेहरे से हमेशा जातिवादी प्रवृत्ति की रही है और इनकी दलित-विरोधी मानसिकता के कारण ही यहां दलित और पिछड़े समाज के लोगों को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ी है।'
'आज भी इसी मानसिकता के कारण दलितों को आत्मसम्मान और स्वाभिमान से जीने का हक खासकर BJP शासित राज्यों में नहीं दिया जा रहा है। उन्हें मिलने वाले आरक्षण के संवैधानिक हक से भी वंचित रखा जा रहा है।'' मायावती ने कहा, ''आरक्षण समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। BJP ने कांग्रेस के साथ मिलकर, आरक्षण की कानूनी व्यवस्था को पहले ही काफी निष्क्रिय बना दिया है, जिस कारण सरकारी नौकरियों में अब दलितों की संख्या लगातार कम होती जा रही है।'

Monday, 30 May 2016

मोदी का काम केवल विरोधियों को कोसना



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सहारानपुर का भाषण भी वास्तव में विरोधी पार्टियों को कोसने का वही पुराना अलाप था और विकास के मामले में भी काफी घिसा-पिटा सा था।
इस सम्बन्ध में हकीकत तो यह है कि अपने सरकार के दो वर्ष की विफलता व जनता से किये गये वायदों को भी नहीं निभा पाने से लोगों में जो व्यापक आक्रोश है उस पर से ध्यान हटाने के लिये ही नरेन्द्र मोदी सरकार की दूसरी वर्षगांठ को सरकारी खर्च पर बड़े ताम-झाम से मानाया जा रहा है।
परंतु वास्तव में देश की जनता उनके द्वारा किये गये विकास में ’अच्छे दिन’ लाने के वायदों का लाभ सही तौर पर मिलता हुआ महसूस करना चाहती है, लेकन नरेन्द्र मोदी की सरकार के दावे के बावजूद उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों में भी अमल होता हुआ देखने को नहीं मिल पा रहा है। इससे बड़ी सरकार की विफलता और क्या हो सकती है।

Saturday, 28 May 2016

मोदी का रवैया यूपी की जनता के लिए पूरी तरह से उदासीन रहा है



मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के दो सालों में कोई ऐसा काम नहीं किया है, जिससे कहा जा सके की मोदी ने अपने वादों को पूरा किया है।
मोदी का रवैया यूपी की जनता के लिए पूरी तरह से उदासीन रहा है।
इसके चलते यूपी की जनता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
अब जनता समझ चुकी है कि भाजपा की बातें मात्र छलावा हैं, ऐसे में जनता का मोह भी भाजपा व मोदी सें भंग हो गया है, जिसका परिणाम आने वाले चुनावों में देखने को मिलेगा।

लाख प्रयासों के बाद भी भाजपा नहीं जुटा पाई भीड़
मोदी व भाजपा की बड़ी-बड़ी बातों का ही परिणाम है कि 26 मई को सहारनपुर में हुई उनकी विकास 'पर्व रैली’ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य हरियाणा व उत्तराखण्ड आदि से भी भीड़ जुटाने का पूरा-पूरा प्रयास किया गया, फिर भी मोदी सरकार के दूसरे वर्षगांठ की रैली मथुरा में हुई पहली वर्षगाँठ की रैली की तरह ही फीकी ही रही है।

भाजपा ने उत्तर प्रेदश की जनता की बुनियादी जरूरतों को भी नहीं किया पूरा
2014 में लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता नरेन्द्र मोदी की बड़ी-बड़ी बातों व उनके लुभावने बहकावों में आ गई और उसने भाजपा को उम्मीद से कहीं ज़्यादा सीटों से जिताकर केन्द्र में उसकी पूर्ण बहुमत वाली पहली सरकार बनवा दी।
परन्तु अब नरेन्द्र मोदी सरकार के दो वर्ष पूरे हो जाने के बावजूद भी उत्तर प्रदेश की जनता को उनकी ज़रूरत की कोई बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।

मोदी सरकार काम नहीं, खाली बयानबाजी करती है
यूपी में मोदी द्वारा किया गया कोई भी वादा पूरा होते हुये नज़र नहीं आ रहा है। आधे से ज़्यादा प्रदेश में सूखे के भीषण संकट के समय में भी उनकी सहायता तो दूर उनका हाल-चाल जानने की ज़रूरत भी नरेन्द्र मोदी सरकार के किसी भी मंत्री ने नहीं की। मा. न्यायालय के फटकार के बावजूद भी प्रधानमंत्री व उनकी सरकार के मंत्रीगण केवल मीडिया में बयानबाज़ी ही करते रहे।

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